महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन

President's rule in Maharashtra

महाराष्ट्र में 19 दिनों से चल रहा घटनाक्रम 12 नवंबर को समाप्त हो गया और राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया सबसे पहले राज्यपाल ने भारतीय जनता पार्टी को सरकार बनाने का न्योता दिया था लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने स्पष्ट रूप से राज्यपाल को बता दिया था कि भाजपा और शिवसेना ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था लेकिन अब शिवसेना साथ में नहीं है इसलिए हम सरकार नहीं बना पा रहे हैं उसके बाद राज्यपाल ने शिवसेना को सरकार बनाने का न्योता दिया लेकिन शिवसेना भी बहुमत जुटाने में नाकामयाब रही और राज्यपाल से और समय देने की मांग की लेकिन राज्यपाल ने मना कर दिया उसके बाद राज्यपाल ने एनसीपी को सरकार बनाने का न्योता दिया लेकिन एनसीपी ने दिन में ही आज बता दिया कि अभी कांग्रेस के साथ उसकी बातचीत चल रही है और अभी कोई जानकारी नहीं दे सकते हैं और नहीं सरकार बना सकते हैं जब यह जानकारी राज्यपाल को मिली तो राज्यपाल ने केंद्र सरकार से राष्ट्रपति शासन लगाने की लगाने का आग्रह किया और बता दिया कि कोई भी पार्टी संवैधानिक रूप से सरकार बनाने में असमर्थ है इसलिए केंद्रीय कैबिनेट फैसला करें केंद्रीय कैबिनेट ने मीटिंग बुलाकर महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की मंजूरी दी और राष्ट्रपति के साथ के पास मंजूरी के लिए भेजा और राष्ट्रपति ने मंजूर कर दिया और 12 नवंबर को महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लग चुका है

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