मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक हुई उसमें महत्वपूर्ण निर्णय

The cabinet meeting was held under the chairmanship of Modi, in which important decisions

06 JAN 2022

इस समझौता ज्ञापन में ऐसी प्रणाली स्थापित करने का प्रयास है, जिससे भारत और तुर्कमेनिस्तान दोनों ही देश एक-दूसरे के आपदा प्रबंधन तंत्र से लाभान्वित होंगे और यह आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में तैयारी, प्रतिक्रिया और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों को मजबूती प्रदान करने में सहायता करेगा।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सीमा शुल्क मामलों में सहयोग और पारस्परिक सहायता से संबंधित भारत और स्पेन के बीच समझौते पर हस्ताक्षर करने को मंजूरी दे दी है।

लाभ:

यह समझौता सीमा शुल्क संबंधी अपराधों की रोकथाम एवं जांच और सीमा शुल्क अपराधियों को पकड़ने के लिए उपलब्ध विश्वसनीय, त्वरित और लागत प्रभावी जानकारी एवं खुफिया जानकारी उपलब्ध कराने में मदद करेगा।

यह समझौता दोनों देशों के सीमा शुल्क अधिकारियों के बीच सूचना साझा करने के लिए एक कानूनी ढांचा प्रदान करेगा और सीमा शुल्क कानूनों के उचित प्रशासन एवं सीमा शुल्क अपराधों की पहचान और जांच एवं वैध व्यापार की सुविधा प्रदान करने में सहायता करेगा।

केन्‍द्रीय मंत्रिमण्डल ने धारचूला (भारत) – धारचूला (नेपाल) में महाकाली नदी पर सेतु के निर्माण के लिए भारत एवं नेपाल के बीच समझौता ज्ञापन को मंजूरी दे दी है।

इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने से दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध और बेहतर होंगे। 

  • केंद्रीय मंत्रिमण्डल ने अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली– हरित ऊर्जा कॉरिडोर चरण-II को मंजूरी दी

    कुल अनुमानित लागत 12,031 करोड़ रुपये से योजना शुरू करने का लक्ष्य

    इस योजना से 2030 तक 450 गीगावॉट स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य प्राप्त करने में सहायता मिलेगी
    आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली (आईएनएसटीएस) के लिये हरित ऊर्जा कॉरिडोर (जीईसी) चरण-II की योजना को मंजूरी दे दी। इसके तहत लगभग 10,750 सर्किट किलोमीटर पारेषण लाइन तथा सब-स्टेशनों की लगभग 27,500 मेगा वोल्ट-एम्पियर (एमवीए) ट्रांसफार्मर क्षमता को अतिरिक्त रूप से जोड़े जाने को मंजूरी दी गई है। इस योजना से सात राज्यों- गुजरात, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, केरल, राजस्थान, तमिलनाडु और उत्तरप्रदेश में ग्रिड एकीकरण और लगभग 20 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा की बिजली निकासी परियोजनाओं को मदद मिलेगी।

इस योजना को कुल 12,031.33 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से शुरू करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें केंद्रीय वित्तीय सहायता (सीएफए) परियोजना के 33 प्रतिशत के बराबर, यानी 3970.34 करोड़ रुपये होगी। पारेषण प्रणाली को वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक की पांच वर्ष की अवधि के दौरान तैयार किया जायेगा। केंद्रीय वित्तीय सहायता से राज्यांतरिक पारेषण शुल्कों का समायोजन करने में मदद मिलेगी और इस तरह बिजली की कीमत को कम रखा जा सकेगा। लिहाजा, बिजली के अंतिम उपयोगकर्ता – देश के नागरिकों को ही सरकारी सहयोग से फायदा पहुंचेगा।

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